UPSC kya hai,UPSC ki full form kya hai| यह किन किन पदों पर भर्ती करती है

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 UPSC ki full form kya hai (Union Public Service Commission )  का गठन 1924 में ली आयोग की सिफारिश पर 1 अक्टूबर 1926 को किया गया था. और इसके प्रथम अध्यक्ष सर रॉस बार्कर को बनाया गया था. 1935 के भारत सरकार अधिनियम के अंतर्गत इसका नाम प्रांतो के लिए प्रांतीय लोक सेवा आयोग और संघ के लिए संघीय लोक सेवा आयोग कर दिया गया। आजादी के तत्पश्चात 26 अक्टूबर 1950 लोक सेवा आयोग के नाम में संशोधन कर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) रखा गया। इस संशोधन का संबंध संविधान के Article 315 in Hindi व  भाग XIV के खंड 2 के अंतर्गत रखा गया है. 

UPSC ki full form kya hai (Union Public Service Commission) के प्रकार 

लोक सेवा आयोग तीन प्रकार के हो सकते हैं। पहला अखिल भारतीय सेवाओं और केंद्रीय सेवाओं की भर्ती के लिए संघ लोक सेवा आयोग (Upsc )

 दूसरा दो या दो से अधिक राज्यों के निवेदन पर गठित संयुक्त लोक सेवा आयोग(Joint  Public Service Commissions,Jpsc ) 

 तीसरा प्रांतीय सेवाओं में भर्ती के लिए राज्य लोक सेवा आयोग (State Public Service Commissions,Spsc)

UPSC ki Full Form Kya Hai हिंदी में संघ लोक सेवा आयोग की सरंचना

 यूपीएससी का एक अध्यक्ष होता है जिसकी रैंक भारत सरकार के सचिव की होती है.

 संघ लोक सेवा आयोग में 9 से 11 और इससे भी अधिक सदस्य हो सकते हैं. इसमें कम से कम आधे सदस्य प्रशासनिक सेवाओं से होनी चाहिए।

  इनके वेतन भत्ते का निर्धारण तथा अन्य सेवा शर्तों का निर्धारण अनुच्छेद 316 और 317 के अंतर्गत संसद द्वारा निर्धारित शर्तों के अधीन राष्ट्रपति या राज्यपाल जैसी स्थिति हो के द्वारा की जाती है.

 संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य और अध्यक्ष यदि सिद्ध कदाचार और अक्षमता के आरोप में अथवा में किसी एक आरोप में हटाए जाना हो, तो राष्ट्रपति इस मामले को सुप्रीम कोर्ट को जांच के लिए भेजेगा और उसकी रिपोर्ट के अनुसार ही आगे की कार्यवाही करेगा। 

कुछ आरोप के आधार पर यदि इनको हटाया जाना हो तो सुप्रीम कोर्ट द्वारा जांच की आवश्यकता नहीं होगी। 

 यदि वह पद ग्रहण करने की तिथि से 6 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुका हो या 65 वर्ष और फिर भी वह पद पर बना हुआ है. 

 उसे किसी समक्ष न्यायालय द्वारा किसी अपराधिक मामलों में 2 वर्ष या उससे अधिक कारावास की सजा दी गई है. उसे किसी समक्ष न्यायालय द्वारा दिवालिया घोषित कर दिया हो और वह आरोप मुक्त ना हुआ हो.

 वह पद पर रहते हुए किसी बाहरी कारोबार में शामिल हो या किसी मौद्रिक लाभ हेतु किसी कंपनी में हिस्सेदार बन जाए अथवा किसी अन्य लाभ के कार्य मे शामिल हो.

 वह मानसिक रूप से सही न हो और चिकित्सा प्रशिक्षण में यह सिद्ध हो चुका हूं.

UPSC

upsc के किन किन पदों पर भर्ती की जाती है .

भारतीय संघ लोक सेवा आयोग के द्वारा कुल 24 प्रकार की भर्ती को करवाया जाता है। जिसमे मुख्य रूप से आईएएस ,आईपीएस ,आईएफएस जैसे उच्च पदों को शामिल किआ गया है। सन 2009 के पहले यूपीएससी द्वारा आईपीएस के पद पर मात्र 150 विद्यार्थियों को रखा जाता था। लेकिन बाद में आयोग द्वारा कुछ संशोधन किया गया और अब 200 पदों के लिए आईपीएस का बहाल होता है। तथा आईएएस के पद अधिकतम 180 या कम भी हो सकते हैं। इस प्रकार संघ लोक सेवा आयोग कुल 24 सेवाओं हेतु अधिकतम 1000 सीटो का निर्धारण करती है।

यूपीएससी भर्ती 2022 ( UPSC Vacancy 2022 )

संख्यासिविल सेवा पद का नाम
1भारतीय प्रशासनिक सेवा (Indian Administrative Service, IAS )
2भारतीय पुलिस सेवा ( Indian Police Service, IPS )
3भारतीय वन सेवा .( Indian Forest Service ,IFoS)
4भारतीय विदेश सेवा (Indian Foreign Service, IFS).
5भारतीय सूचना सेवा ( Indian Information Service ,IIS).
6भारतीय डाक सेवा ( Indian Postal Service,IPoS).
7भारतीय राजस्व सेवा (Indian Revenue Service,IRS)
8भारतीय व्यापार सेवा ( Indian Trade Service,ITS).
9रेलवे सुरक्षा बल (Railway Protection Force, RPF).
10पांडिचेरी सिविल सेवा ( Pondicherry Civil Service,PCS).
11पन्डिचेरी पुलिस सेवा ( Pondicherry Police Service,PPS).
12दिल्ली, अंडमान निकोबार आईलैंड्स सिविल सेवा (Delhi, Andaman & Nicobar Islands, Civil Service,DANICS).
13दिल्ली, अंडमान निकोबार आइलैंड, लक्ष्यदीप, दमन दीव, दादर नगर हवेली पुलिस सेवा ( Delhi, Andaman & Nicobar Islands, Police Service, DANIPS)
14इंडियन ऑडिट एंड अकाउंट्स सर्विस ( Indian Audit and Accounts Service,IAAS)
15इंडियन सिविल अकाउंट्स सर्विस ( Indian Civil Accounts Service,ICAS).
16इंडियन कॉरपोरेट लॉ सर्विस ( Indian Corporate Law Service,ICLS).
17इंडियन डिफेंस एस्टेट सर्विस ( Indian Defence Estates Service,IDES).
18इंडियन डिफेंस अकाउंट्स सर्विस ( Indian Defence Accounts Service,IDAS).
19इंडियन ऑर्डिनेंस फैक्ट्रीज सर्विस ( Indian Ordnance Factories Service, IOFS).
20इंडियन कम्युनिकेशन फैक्ट्रीज सर्विस (Indian Communication Factory Services,ICFS).
21इंडियन रेलवे अकाउंट्स सर्विस ( Indian Railway Accounts Service,IRAS).
22इंडियन रेलवे पर्सनल सर्विस ( Indian Railway Personnel Service,IRPS).
23इंडियन रेलवे ट्रेफिक सर्विस ( Indian Railway Traffic Service,IRTS).
24आर्म्ड फोर्सेज हेड क्वार्टर्स सिविल सर्विस ( Armed Forces Headquarters Civil Service ,AFHCS).

Comptroller & Auditor General Of India

यूपीएससी(UPSC) की तैयारी कैसे करें(UPSC ki Taiyari kaise kare in HINDI)

संघ लोक सेवा आयोग जिसे हम Union Public Servics Commission  भी कहा जाता है। देश की सबसे कठिन प्रतियोगिता परीक्षा में से एक है। Upsc  के लिए देश भर से लगभग 10,00,000 उम्मीदवार अभ्यर्थी हर साल फॉर्म फिल करते हैं। जिसमें से प्रारंभिक परीक्षा (PT) में बैठने वाले उम्मीदवारों की संख्या लगभग 50% होती है। यूपीएससी की सिविल सेवा की परीक्षा की चयन प्रक्रिया दो भागों में पूर्ण की जाती है।

चरण 1  Preliminary Examination (प्रारंभिक परीक्षा) हर साल इसे जून में आयोजित की जाती है। तथा प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम अगस्त में घोषित कर दिए जाते है।

चरण 2 (mains Examination) मैंस परीक्षा हर साल अक्टूबर में आयोजित की जाती है। परिणाम जनवरी में घोषित किए जाते हैं।

संघ लोक सेवा आयोग के कार्य

 विभिन्न सेवाओं हेतु भर्ती करना ( सरकार के निर्देशानुसार) उसका अनिवार्य कार्य है.

 यदि दो या दो से अधिक भारतीय राज्य सिविल सेवा में भर्ती के लिए संघ लोक सेवा आयोग से विभिन्न योजनाएं बनाने का निवेदन करते हैं. तो उनकी सहायता करना

 निम्नलिखित मामलों में सरकार को परामर्श देना जैसे

   (a) भर्ती पद्धति से संबंधित मामलों में 

(b ) सिविल पदों नियुक्ति संबंधी सिद्धांत के निर्धारण में

(c ) अनुशासनात्मक मामलों में 

(d ) पेंशन आदि संबंधित दावेदारी मामलों में

(e ) क्षतिपूर्ति मामलों में

 note -संघ लोक सेवा आयोग अनुच्छेद 320 के अंतर्गत वर्णित कार्यों के अतिरिक्त कोई अन्य कार्य तभी कर सकता है. जब अनुच्छेद 321 के अंतर्गत संसद उसे अन्य कार्य भी सौंप दें.

  • राज्य के राज्यपाल को संबंधित लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्य की नियुक्ति का अधिकार है. साथ ही वह ऊपर बताये गए किसी आरोप के आधार पर निलंबित भी कर सकता है. किंतु उन्हें पद से हटाने का अधिकार केवल राष्ट्रपति के पास है.
  •  लोक सेवा आयोग (Upsc )के अध्यक्ष वह सदस्य सेवानिवृत्ति के पश्चात कोई लाभ का पद ग्रहण नहीं कर सकते हैं. किंतु उन्हें उसी व्यवस्था में उच्च पद ग्रहण करने का अधिकार है.
  •  राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्य पद ग्रहण करने की तिथि से 6 वर्ष या 65 वर्ष तक जो भी पहले गठित हो तब तक अपने पद पर बने रहते हैं. किंतु संयुक्त लोक सेवा आयोग और संघ लोक सेवा आयोग के लिए यह अवधि 6 वर्ष है किंतु अधिकतम उम्र 65 वर्ष है.

क्या लोक सेवा आयोग की सिफारिशें मानना सरकार के लिए बाध्यकारी है.

अनुच्छेद 320 संघ लोक सेवा आयोग को एक परामर्शदाई निकाय बनाता है.अनुच्छेद 320 के अंतर्गत राष्ट्रपति को यह अधिकार है. कि वह उन नियमो  को बनाए जिसके अंतर्गत संघ लोक सेवा आयोग को कार्य करने की अनुमति न दी जाए.

अनुच्छेद 315, 320 आदि में यह कहा जा सकता है. की यूपीएससी केवल परामर्श संस्था आए हैं.उसकी सिफारिशें मारना सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं है. 

केवल ऐसे परीक्षा संचालित करने में स्वतंत्रता प्राप्त है. ऊपरी आयु सीमा का निर्धारण, परीक्षा पद्धति और आरक्षण जैसे मामलों में कार्यमिक पेंशन व लोकाशिकायत मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले कामिक व परिक्षण  विभाग के द्वारा निर्धारित नियम लागू होते हैं. उन्हें upsc  की कोई विशेष भूमिका नहीं है

संघ लोक सेवा आयोग का संविधानिक महत्व क्या है.

 सबसे पहली बात कि जब सरकार इसके परामर्श को मारने के लिए बाध्य नहीं है.तब डॉक्टर अंबेडकर ने इसके महत्व को रेखांकित करते हुए कहा था.कि लोक सेवा योजन के मामले में पारदर्शिता आवश्यक है. इसलिए यदि सरकार इसकी सिफारिश नहीं मानती है. तो उसे संसद को तर्क देकर समझाना होगा कि उसने किन परिस्थितियों में आयोग की सिफारिशें नहीं मानीहै। अनुच्छेद 323 के अंतर्गत आयोग अपनी वार्षिक रिपोर्ट ( भर्ती ,परीक्षा प्रणाली अनुशासनात्मक कार्यवाही आदि के संबंध में) राष्ट्रपति को सौंपते हैं. जिसे राष्ट्रपति सदन के पटल पर रख रखवाता है। इस रिपोर्ट में आयोग यह स्पष्ट उल्लेख करता है. कि उसकी कौन-कौन सी सिफारिशें नहीं मानी गई है. अब सरकार को भी विरोधी दलों को यह समझाना होता है. कि उसने क्यों इन परामर्श को नहीं माना इससे लोक सेवा में पारदर्शिता आती है। और संसद के प्रति सरकार जवाबदेह बनी रहती है

 

किसी एक परिस्थिति का उल्लेख करें जब सरकार को आयोग की सिफारिश माननी ही होती है 

यदि किसी सरकारी आदेश में अथवा संसद के द्वारा बनाए नियम के अंतर्गत यह उल्लेख कर दिया कि सरकार किसी सेवा हेतु भर्ती करते समय आयोग से परामर्श करेगी तो वह सरकार पर बाध्यकारी होगा। उदाहरण के लिए सन 1966 में सरकार ने भारतीय वन सेवा( प्रारंभिक नियुक्ति) विनियमन के अंतर्गत भारतीय वन सेवा के पदाधिकारियों की नियुक्ति करते समय सरकार संघ लोक सेवा आयोग से परामर्श करेगी और सरकार को यह परामर्श लेना ही होगा। 

कुछ नियुक्तियों के मामले में सरकार आयोग से परामर्श नहीं करती है 

  •  अनुच्छेद 335 के अंतर्गत सरकार जब अनुसूचित जाति, जनजाति तथा अन्य पिछड़े वर्ग के लोगों को सरकारी सेवा में नियुक्ति करती है.( उनकी दावेदारी को ध्यान में रखते हुए)तो इस मामले में आयोग से परामर्श नहीं करती हैं.
  •  संयुक्त सचिव और उसके ऊपर पदाधिकारियों की नियुक्ति में
  •  राजनैनिक की नियुक्तियों में 
  • विभिन्न आयोग अधिकरणों आदि सदस्य व अध्यक्ष की नियुक्ति में जैसे राष्ट्रीय महिला आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, केंद्रीय सूचना आयोग, केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण आदि के अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति में। 
  •  सी श्रेणी और डी श्रेणी के अधिकांश पदों की नियुक्ति में.

1 अक्टूबर 1926 को जब पहली बार लोक सेवा आयोग का गठन हुआ तो सर रॉस बार्कर इसके अध्यक्ष बनाए गए थे। upsc एक संवैधानिक निकाय है. किंतु इसकी संघीय सरंचना सन 1937 में भारत सरकार अधिनियम 1935 के अंतर्गत निर्मित हुई थी.यूपीएससी के अध्यक्ष व सदस्यों के वेतन ,भत्ते , सेवा शर्तों आदि का निर्धारण राष्ट्रपति कर सकता है. बशर्ते की संसद ने इस संबंध में पहले से कोई नियम निर्धारण  न कर रखा हो। (आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों को पेंशन नहीं दिया जाता है. किंतु उन्हें जीवन निर्वाह के लिए भते दिए जा सकती है.

Article 310(1 ) in Hindi  सैन्य सेवा व लोक सेवा दोनों का उल्लेख करता है. उनके अनुसार दोनों सेवाओं के पदाधिकारी/ कर्मचारी राष्ट्रपति के अथवा गवर्नर जैसी स्थिति हो प्रसादपर्यंत अपने पद पर बने रहते हैं.

 Article 310 (2 ) in Hindi केवल सिविल सेवा का उल्लेख करता है. संघ और राज्य दोनों की अधीन आती है.

Article 311 (1 ) in Hindi जिस रैंक पदाधिकारी ने किसी सिविल सेवक की नियुक्ति की है. उससे नीचे के रैंक का कोई भी पदाधिकारी उस सिविल सेवक के विरुद्ध कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं कर सकता।  उदाहरण के लिए आईजी रैंक के अधिकारी ने किसी पुलिस इंस्पेक्टर की नियुक्ति की है. तो डीआईजी रैंक का अधिकारी न तो उस इंस्पेक्टर को उसके पद से हटा सकता और ना ही उसकी रैंक को घटा सकता है.

Article 311 (2 ) in Hindi यदि किसी सिविल  सेवक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है तो उसे अपने बचाव में पूरी बात कहने के सभी अवसर उपलब्ध करवाए जाएंगे। इसके दो अर्थ होते है।  पहला उस सिविल सेवकों खुद को निर्दोष सिद्ध करने के पर्याप्त अवसर दिए जाएंगे। दूसरा उसके विरुद्ध लाए गए सबूतों का वह परीक्षण कर सकता है. और अपनी विरुद्ध लगाए गए आरोपों को नकार की सकता है.

भारत संघ बनाम रायपाल 1996 के मुकदमे में सुप्रीम कोर्ट ने यह व्यवस्था दी थी। यदि कोई सिविल सेवक जानबूझकर उपलब्ध अवसरों का लाभ नहीं उठाता।  तो वह बाद में अपने विरूद्ध की गई कार्यवाही का प्रतिकार नहीं कर सकता है. और इस आधार पर उसे कोई भी राहत नहीं मिलेगी हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य मुकदमे श्याम पाल में यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि सरकार की गलती के कारण आरोपित व्यक्ति खुद को निर्दोष सिद्ध करने से वंचित रह जाता है. तो ऐसी स्थिति में उसके विरुद्ध की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही उचित नहीं मानी जाएगी और न्यायालयों उसे रद्द कर सकता है.

Article 310 (2 ) in Hindi का अपवाद 

उपरोक्त अवसर प्रसंविदा (कॉन्ट्रैक्ट) आधारित सेवाओं पर लागू नहीं होता है.यह अनुच्छेद 310 (2 ) का अपवाद है

 भारत सरकार व राज्य सरकारों को कई बार तकनीकी रूप से विशेषज्ञ सेवाओं की आवश्यकता होती है. जिसके लिए कॉन्ट्रैक्ट करनी पड़ती है. ऐसे व्यक्तियो को अस्थाई सिविल सेवक की भांति किसी सेवा जैसे वेतन,भते , पेंशन आदि का लाभ नहीं मिलता। सरकार जब चाहे इन्हे  बर्खास्त कर सकती हैं. बशर्ते कि वह कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार उसकी क्षतिपूर्ति करते हैं. किंतु निम्नलिखित दो परिस्थितियों में वह मौद्रिक भरपाई करना भी आवश्यक नहीं होता है. पहला यदि कॉन्ट्रैक्ट आधारित पद ही समाप्त कर दिया गया हो और उसकी पूर्व सूचना इस पद पर कार्य व्यक्ति को दे दी गई हो। दूसरा यदि कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर नियुक्त पदाधिकारी को किसी दुर्व्यवहार  में हटाया जाता है

Article 310 in Hindi का अपवाद

निम्नलिखित तीन परिस्थितियों में किसी .सिविल  सेवक को खुद के बचाव से वंचित किया जा सकता है। यह भी अनुच्छेद 310 का अपवाद है।

  यदि उसे अपराधिक आरोप में जेल की सजा हो गई हो अथवा कोई अन्य दंड दिया गया हो ।

यदि अनुशासन की कार्यवाही करने वाले पदाधिकारी को ऐसा लगता है। कि दोषी सिविल सेवक को अपने बचाओ में कुछ कहने का अवसर नहीं देना उचित होगा। बशर्ते कि वह पदाधिकारी इसे  लिखित रूप में दर्ज करें । सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सिंह बनाम पंजाब राज्य 1996 के एक मुकदमे में इस अपराध को उचित ठहराते हुए कहा कि यदि कोई पुलिस कांस्टेबल किसी आंतकवादी घटना में शामिल हो तो उसे सरकार सीधे बर्खास्त कर सकती है। इसके लिए उसे अवसर देने की जरूरत नहीं है ।

यदि राष्ट्रपति या राज्यपाल को ऐसा लगता है। कि देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किसी दोषी व्यक्ति के विरुद्ध की जाने वाली अनुशासनात्मक कार्यवाही मैं उसे बिना अवसर दिए दंड दिया जाना आवश्यक है। तो वह ऐसा कर सकते हैं।

ट्रिब्यूनल कोर्ट क्या है (Tribunal Court in Hindi )

42 वें संविधान संशोधन  के द्वारा क्रमशः 323a 323b के अंतर्गत प्रशासनिक तथा अन्य अधिकरणों  की व्यवस्था की गई है। इसकी विशेष बात यह है कि केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण का गठन केवल केंद्र सरकार कर सकती है। राज्यों सरकारों को इन के गठन का अधिकार नहीं है। जब 323b के अंतर्गत अन्य अधिकारियों जैसे भू सुधार किराया, कर संबंधी विवाद के निपटारे के लिए गठित किए जाते हैं। का गठन राज्य सरकार ही कर सकती हैं।

 अनुच्छेद 323a के अंतर्गत पहली बार 1985 में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण का गठन किया गया । इसकी पीठ विभिन्न राज्यों में स्थित है। और यह अधिक भारतीय सेवा केंद्रीय सिविल सेवा, राज्य सिविल सेवा के पदाधिकारियों की भर्ती तथा सेवा शर्तों के संबंध में नियोक्ता के साथ उपजे किसी भी विवाद का निपटारा करती है।

42 वें संविधान संशोधन के अंतर्गत हाई कोर्ट को अधिकरणों के फैसलों विरुद्ध  किसी अपील को सुनने से वंचित कर दिया गया था केवल सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 32 अनुच्छेद, 136 के अंतर्गत यह सुनवाई कर सकता था ।किंतु चंद्र कुमार बनाम भारत संघ 1998 के मुकदमे में सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 323a (2)d, 323b (3)d के दायरे को  सीमित करते हुए यह व्यवस्था  की हाईकोर्ट भी अधिकरण के फैसलों के विरुद्ध अपील सुन सकेगी ।

 

एस लेख में आपने upsc ki full form और इसके हमारे सविधान में दिया गये अनुछेद के बारे में बताया है .अगले लेख में हम आपको upsc ki taayari कैसे करे के बारे में पुरे विस्तार से बताया जाएगा .उम्मीद करते करते है. हमारे द्वारा upsc ki full form ki जानकारी पसन्द आई होगी .

NITI Aayog (राष्‍ट्रीय भारत परिवर्तन संस्‍थान) In Hindi (National Institution For Transforming India)

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