संवैधानिक संशोधन(constitutional amendment) क्या है । 42वा व 44वा संवैधानिक संशोधन(constitutional amendment)

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हेलो दोस्तों इस लेख में हम भारतीय संविधान अनुच्छेद 368 के बारे मे बात करेंगे.इस अनुच्छेद में संविधानिक संशोधन(Constitutional Amendment)  की प्रक्रिया के बारे में बताया गया है. उदाहरण के लिए प्रथम संशोधन 1951 में हुआ ,जिसमे नागरिकों के स्वतंत्रता के अधिकार पर प्रतिबंध लगाने की व्यवस्था की गई थी. ऐसे बहुत से भारत में संविधान संशोधन हुए हैं,इस लेख में हम मुख्य रूप से  संवैधानिक संशोधन की प्रक्रिया और 42वा संविधान संशोधन और 44 संविधान संशोधन का विस्तार से अध्ययन करें.

संवैधानिक संशोधन क्या है तथा महत्त्वपूर्ण संशोधन (Process of Constitutional Amendment and Major Amendments )

प्रथम विधि

संविधान की कुछ धाराएँ ऐसी हैं जिनमें संसद उसी प्रकार से संशोधन कर सकती है , जिस प्रकार उसके द्वारा साधारण कानून पास किए जाते हैं । इस दृष्टि से हमारा संविधान लचीला ( Flexible ) है ।

 

पहली श्रेणी में मुख्य रूप से निम्नलिखित बाते शामिल हैं

नए राज्यों का निर्माण तथा उन्हें भारतीय संघ में शामिल करना ।

( i ) वर्तमान राज्यों का पुनर्गठन करना उनकी सीमाओं तथा नामों में परिवर्तन करना ।
( iii ) भारत की नागरिकता सम्बन्धी विषय .
( iv ) राज्य की विधानसभा की सिफारिश पर उस राज्य में विधान परिषद् की स्थापना करना अथवा उसे समाप्त करना .
( v ) राष्ट्रभाषा सम्बन्धी विषय.
( vi ) सर्वोच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार का विस्तार करना तथा न्यायाधीशों की संख्या.
( vii ) संसद सदस्यों के वेतन , भत्ते तथा अन्य सुविधाएँ निश्चित करना ।
( viii ) अनुसूचित जातियों , अनुसूचित जनजातियों तथा पिछड़े हुए कबीलों आदि से सम्बन्धित विषय.
( ix ) संसद तथा राज्य विधानमण्डलों के सदस्यों के लिए योग्यताएँ निश्चित करना ।
( x ) संघीय लोक सेवा आयोग को अतिरिक्त कार्य सौंपना आदि.

 

दूसरी विधि

दूसरी विधि श्रेणी में वे अनुच्छेद हैं , जिनमें संशोधन का वर्णन धारा 368 में किया गया है । संविधान की अधिकाँश धाराओं में संशोधन इसी ढंग से किया जा सकता है । इस ढंग के अनुसार संविधान के अनुच्छेदों में संशोधन संसद के समस्त सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित सदस्यों के दो तिहाई बहुमत से किया जा सकता है । यहाँ यह बता देना आवश्यक है कि संविधान के भाग III तथा IV में भी संशोधन इसी ढंग से किए जाने की व्यवस्था की गई है । परन्तु 1969 में सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया कि संसद द्वारा मौलिक अधिकारों में संशोधन नहीं किया जा सकता ।

फिर 24 वें संशोधन द्वारा संसद ने मौलिक अधिकारों को संशोधित करने का अधिकार प्राप्त कर लिया । सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व निर्णयों में 24 वें संशोधन को वैध माना है , अतः आज भारतीय संसद को संविधान संशोधन के पूर्ण अधिकार हैं । संसद निदेशक सिद्धान्तों को लागू करने के लिए मौलिक अधिकारों को संशोधित एवं सीमित कर सकती है

 

तीसरी विधि

तीसरी विधि या श्रेणी में संविधान के वे अनुच्छेद आते हैं , जिनमें संशोधन करने के लिए संविधान की धारा 368 में अत्यन्त कठोर ढंग का वर्णन किया गया है । इन अनुच्छेदों में संशोधन के लिए पहले संसद के दोनों सदनों में अलग – अलग ढंग से समस्त सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित सदस्यों के 2/3 बहुमत से प्रस्ताव पास करना होता है तथा बाद में इसे कम – से – कम आधे राज्यों की विधानसभाओं की स्वीकृति प्राप्त करनी होती है । दूसरे शब्दों में , इस संशोधन की विधि में निम्नलिखित दो स्तर आते हैं
( i ) संसद के दोनों सदनों द्वारा समस्त सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित सदस्यों के 2/3 बहुमत से संशोधन प्रस्ताव का पास किया जाना ।
( ii ) उस प्रस्ताव को कम – से – कम आधे राज्यों की विधानसभाओं स्वीकृति प्राप्त होना चाहिए । इस श्रेणी में संशोधन के वे अनुच्छेद रखे गए हैं जो कि संविधान के मौलिक सिद्धान्तों तथा संघात्मक सिद्धान्तों का वर्णन करते हैं ।

भारतीय संविधान में संशोधन करने की प्रक्रिया की तीन प्रमुख विशेषताएँ

( i ) संविधान में संशोधन विधेयक संसद के दोनों सदनों में से किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है और उसे दोनों सदनों द्वारा अलग – अलग रूप से पास होना चाहिए ।
( ii ) मतभेद होने पर दोनों सदनों का संयुक्त अधिवेशन नहीं बुलाया जाता , क्योंकि दोनों के अधिकार समान हैं । संशोधन विधेयक पर उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों के दो – तिहाई बहुमत और कुल सदस्य संख्या के बहुमत मतदान के समय जरूरी है , उससे पहले नहीं ।

42वा सवैधानिक संशोधन की मुख्य विशेषताओं ।भारतीय सविधान के अंदर एक भूत महत्पूर्ण सविधान संशोधन।

59 अनुभागों वाला यह ‘ लघु संविधान ‘ ( Mini Constitution ) सन् 1976 में आपातकाल मतलब इन्दिरा गांधी की सरकार के दौरान पास किया गया था ।
( i ) राष्ट्रपति के लिए मन्त्रिपरिषद् की सलाह मानने को आवश्यक बनाने
( ii ) लोकसभा और विधानसभाओं का कार्यकाल 6 वर्ष करने
( iii ) संसद की सर्वोच्चता कायम करने
( iv ) उद्देशिका या प्रस्तावना में समाजवादी पंथ – निरपेक्षता word add किए गए
( v ) केन्द्र – राज्य सम्बन्ध में परिवर्तन करने

( vi ) मौलिक अधिकारों के ऊपर राज्य के नीति – निदेशक सिद्धान्तों को प्रमुखता देने

( vii ) न्यायपालिका की न्यायिक पुनर्निरीक्षण की शक्ति को निष्प्रभावी बनाने
( viii ) राज्यों में सशस्त्र सेनाएँ भेजने तथा देश के किसी एक भाग में आपात स्थिति लागू करने आदि की व्यवस्था की गई ।

 

44 वें संवैधानिक संशोधन की मुख्य बाते

जनता पार्टी की सरकार ने , जिसने कि मार्च , 1977 के लोकसभा चुनाव में सत्ता प्राप्त की थी , 45 वाँ संशोधन बिल मई , 1978 में लोकसभा में पेश किया था , जिसमें 45 धाराएँ थीं । चूँकि राज्यसभा में विरोधी दलों का बहुमत था , इसलिए उसने इस संशोधन की कुछ धाराओं को अस्वीकृत करके शेष बिल को पास कर दिया , जो दोबारा लोकसभा द्वारा पास किया गया ।

तत्पश्चात् संविधान की व्यवस्था के अनुसार इस बिल को 12 राज्यों की विधानसभाओं ने स्वीकृति दे दी । 30 अप्रैल , 1979 को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त करने के बाद यह 45 वाँ संशोधन बिल संविधान का 44 वाँ संशोधन बन गया ।

इस संधोशन के अन्तर्गत सम्पत्ति के अधिकार को कानूनी अधिकार बना दिया गया है । किसी भी व्यक्ति को उसकी सम्पत्ति से कानून के अनुसार ही वंचित किया जा सकता है ।

अनुच्छेद 352 के अन्तर्गत राष्ट्रपति संकटकाल की घोषणा तभी कर सकता है , यदि मन्त्रिमण्डल राष्ट्रपति को संकटकाल की घोषणा करने की लिखित सलाह दे । संकटकाल की घोषणा तभी की जा सकती है , यदि भारत को अथवा भारत के किसी भाग की सुरक्षा को युद्ध अथवा बाहरी आक्रमण अथवा सशस्त्र विद्रोह ( Armed Rebellion ) से खतरा हो ।

जीवन और स्वतन्त्रता के अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए यह व्यवस्था की गई कि संकटकाल में भी इन अधिकारों के सम्बन्ध में न्यायालय में अपील करने के अधिकार को स्थगित नहीं किया जा सकता । राष्ट्रपति और उप – राष्ट्रपति के चुनाव से सम्बन्धित सभी सन्देह और विवादों की जाँच तथा निर्णय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किए जाएँगे और सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय अन्तिम होगा ।

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की अवधि 6 वर्ष से हटाकर 5 वर्ष किए जाने की व्यवस्था है ।

 

42वा संविधान संशोध.न और 44 संविधान संशोधन का विस्तार से अध्ययन करें

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