अनुच्छेद 16 ( article 16 in Hindi )सेवा योजन मे अवसरों की समानता

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हेलो दोस्तों समानता का अधिकार में हमने अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता तथा अनुच्छेद 15 के अंतर्गत हमने पढ़ा था कि किसी व्यक्ति के साथ उसके धर्म ,जाति ,प्रजाति, लिंग,व जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा का वर्णन पिछले मे करने के बाद अनुच्छेद 16  (article 16 in Hindi) में लोक योजन के विषय में अवसरो की समानता प्रदान करने का प्रावधान किया गया किया गया है के बारे मे अध्यन करने वाले है।

अनुच्छेद 16  ( Article 16 in Hindi) सेवा योजन मे अवसरों की समानता

अनुच्छेद 16(1). राज्य के अधीन किसी पद पर नियुक्ति या किसी सेवा योजन के मामलो में हर नागरिक समान अवसर उपलब्ध कराने की गारंटी दी गई है।

अनुच्छेद 16 (2) धर्म ,जाति ,प्रजाति, लिंग ,जन्म स्थान मूल वश तथा आवास / निवास अथवा इन में से किसी एक के आधार पर( केवल इन्हीं के आधार पर राज्य सेवा योजन या नियुक्ति में नागरिकों के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा)

अनुच्छेद 16( 3) संसद को यह अधिकार होगा कि राज्य के अधीन किसी सेवा योजन या पद नियुक्ति के मामले में निवास को एक अनिवार्य अर्हता बनाने संबंधी कानून बना सकती है।यह केंद्र राज्य तथा स्थानीय निकाय के अधीन सभी सेवाओं पर लागू किया जा सकता है ( यह  7वे संविधान संशोधन 1956 के द्वारा जोड़ा गया)

निवास अथवा आवास संबंधी अर्हता का निर्धारण केवल संसद कर सकती है राज्य विधान मंडलों को यह अधिकार नहीं है इससे प्रमुख बात यह है कि इससे पूरे देश में एकरूपता बनी रहेगी अर्थात X राज्य सरकारी नौकरी में निवास को एक अनिवार्य योग्यता बनाता है तो इसे Y राज्य भी बना सकता है क्योंकि यह पूरे भारत राज्य क्षेत्र के लिए प्रभावी होगा।

अनुच्छेद 16(4 ) समाज के पिछड़े वर्ग के नागरिकों के लिए राज्य सरकारी नौकरियों में आरक्षण कर सकता है।

अनुच्छेद 16 (4a) प्रोन्नति में अनुसूचित जाति तथा जनजाति के लिए आरक्षण किया जा सकता है ।(77वे संविधान संशोधन 1995 के द्वारा लागू)।
परिणामिक जेष्ठता( परिणामी जेष्ठता )की व्याख्या( प्रोन्नति में आरक्षण से संबंधित 86वे सविधान संशोधन, 2001 के द्वारा जोड़ा गया।

सरकारी नौकरियों में अन्य पिछड़े वर्गों (OBC) को आरक्षण संबंधी विवाद
1. काका कालेसर आयोग/ समिति 1955
2. मंडल आयोग 1977
3. इंदिरा साहनी वाद 1993( इसी मंडल बाद के नाम से भी जाना जाता है)
मंडल आयोग वाद अथवा इंदिरा साहनी वाद सुप्रीम कोर्ट(SC) के 9 न्यायाधीशों की पीठ के द्वारा निम्नलिखित व्यवस्था दी गई ।
1. विधानमंडल अथवा कार्यपालिका को आरक्षण देने का अधिकार है। विधायिका कानून बनाकर और कार्यपालिका आदेश देकर सरकारी नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था कर सकती है ।
2. अनुच्छेद 16(4) अनुच्छेद 16 (1)(Article 16 in Hindi) (का अपवाद नहीं है क्योंकि दोनों ही दिशा में दिशा एक है बस फर्क यह है कि 16(4) समाज में सामाजिक न्याय की स्थापना के लिए लाभार्थियों का वर्गीकरण करता है ।
16(4) समाज के पिछड़े वर्गों के नागरिकों के लिए सरकारी नौकरी के मामले में उनको राज्य द्वारा विशेष तर्जीय देने की बात करता है ।
16 (4)के अंतर्गत जिस पिछड़ेपन का उल्लेख किया गया है कोई जरूरी नहीं कि वह आर्थिक व सामाजिक दोनों हैं ,वास्तव में यह मुख्यतः सामाजिक हो, पिछड़े वर्गों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने के लिए जाति को आधार बनाया जाना चाहिए ।उस जाति को इस उद्देश्य हेतु वर्ग मना जाए यदि उस जाति के X को आरक्षण का लाभ मिलता है तो उस जाति के Y को भी यह लाभ मिलना चाहिए।

पिछड़े वर्गों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने के लिए उनके साधन अथवा आर्थिक हैसियत को भी ध्यान में रखा जाए अर्थात व्यक्ति के स्तर पर( न की जाति के आधार पर )यह देखना आवश्यक होगा उस व्यक्ति को आर्थिक स्थिति कैसी है यदि वह संपन्न है तो उसे इसका लाभ नहीं मिलना चाहिए सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे व्यक्ति या परिवारों को मलाईदार ( क्रीमी लेयर )का नाम दिया है क्रीमी लेयर के लोग या परिवार सामान्य श्रेणी में गिने जाएंगे और उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा किंतु इसके लिए सालाना आय का निर्धारण सरकार करेगी ना कि न्यायालय।(NOTE:-पिछड़ेपन के लिए जाति को आधार बनाया गया तथा आरक्षण के लिए सामाजिक हैसियत को आधार बनाया गया)

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने पिछड़े वर्ग को सामान्य पिछड़े वर्ग और अत्यंत पिछड़े वर्ग में वर्गीकृत किए जाने को सही माना है।आरक्षण की ऊपरी सीमा 50% से अधिक कि नहीं होनी चाहिए यह हर वर्ष प्रकाशित रिक्तियों के आधार पर तय होगी।
यदि पिछले वर्ष किसी रिक्ति को पिछड़े वर्ग या अन्य पिछड़े वर्ग से भरा नहीं जा सका है। तो ऐसी दशा में इसे अगले वर्ष भरा जा सकता है किंतु किसी भी दिशा में उस वर्ष की आरक्षण की सीमा 50% ही रहेगी ( इसे निष्प्रभावी करने के लिए 81वें संविधान संशोधन एक्ट 2000 बाजपेयी सरकार ने पारित करवाया) 50% कि यह सीमा अत्यंत असाधारण परिस्थितियों में ही लागी जा सकती है। [ ( तमिलनाडु में राज्य सेवाओं में 71वे संविधान संशोधन 1994 के द्वारा आरक्षण की ऊपरी सीमा 69% तक कर दी है) जो कि 50% से अधिक है]

अनुच्छेद 16 (4) के अंतर्गत सरकारी नौकरियों में दिए जाने वाला आरक्षण केवल प्रवेश के बिंदु तक ही सीमित रहेगी प्रोन्नति में आरक्षण नहीं दिया जा सकता इसे निष्प्रभावी करने के लिए नरसिंहमा राव की सरकार ने 77 वां संविधान संशोधन अधिनियम 1995 पारित करवाया सुप्रीम कोर्ट ने यह व्यवस्था दी की एक स्थाई समिति निकाय का गठन कर इसे यह दायित्व सौंपा जा सकता है कि वह यह देखें कि किन वर्गों को आरक्षण का अधिक लाभ मिला है वह किन वर्गों को कम इसका लाभ मिला है नरसिम्हा राव सरकार ने क्रीमी लेयर की पहचान करने के लिए रामनंदन समिति 1993 का गठन किया था और इसकी सिफारिश लागू की थी इससे संबंधित किसी भी तरह के विवाद को विशेषकर निर्धारित मापदंड को केंद्र सरकार से जुड़ा है, या राज्य सरकार से एवं सुप्रीम कोर्ट में ही उठाया जा सकता है

पिछड़ा कौन है( article 16 in Hindi )
संविधान में पिछड़े वर्ग की कोई परिभाषा नहीं दी गई किंतु k.c बसंथ कुमार बनाम कर्नाटक राज्य 1985 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने पिछड़ेपन को परिभाषित करने का प्रयास किया .जस्टिस चिनप्पा रेडी, 1985 के अनुसार गरीबी ,समाज में जाति की हैसियत पेशा और निवास स्थल के आधार पर किसी वर्ग को पिछड़ा वर्ग माना जा सकता है जस्टिस बी.पी जीवन रेडी ने मंडल वाद में फैसले देते हुए चिन्नपा रेड्डी के विचारों को दोहराया, अंत: एक बात स्पष्ट है केवल जाति को पिछड़ेपन का आधार नहीं बनाया जा सकता है

पुन: L. बजाज बनाम मैसूर 1963 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया था कि सामाजिक न्याय की आढ़ में प्रतिभा का गला नहीं घोटा जा सकता ।(अनुच्छेद 335 इसी से संबंधित है ) अतः इसी मत को ध्यान में रखते हुए मंडल वाद में सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण की ऊपरी सीमा 50% तक सीमित कर रखी है इसमें लगभग 22.5% अनुसूचित जाति जनजाति के लिए, 27% ओबीसी के लिए जबकि शेष दिव्यांग जनों के लिए आरक्षित है(ऐसे दिव्यांगजन अनुसूचित जाति ,जनजाति ,ओबीसी श्रेणी से है उनका समायोजन उन्ही श्रेणी में से किया जाएगा जिससे यह आरक्षण 3% हो जाता है )1994 में नरसिंहमा राव की सरकार में शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों के लिए सरकारी सेवाओं में आरक्षण देने के लिए( केंद्रीय सेवाओं में) एक संबंधित अधिनियम पारित कराया था जिसे प्रभावी बना दिया गया था।

कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न जिनका जवाब आपको कमेंट बॉक्स में हम तक पहुंचाना है।
पहला :- प्रोन्नति में आरक्षण क्यों अनुसूचित जाति ,जनजाति को ही उपलब्ध है।
दूसरा:- अनुसूचित जाति ,जनजाति का केंद्रीय सेवाओं में शीर्ष पदों पर पहुंचना क्यों कठिन है।
तीसरा:- क्रीमी लेयर ओबीसी पर ही क्यों लागू होता है।

तो आपको Article 16  In Hindi  की जानकारी कैसी लगी नीचे कमेंट करके जरूर बताएं। इसमे मैने Article 16 In Hindi अगर इससे संबंधित कोई प्रश्न हो तो आप नीचे कमेंट करके पूछ सकते है, बाकी पोस्ट को शेयर जरूर करें।

अधिक जानकारी के आप आर्टिकल 14 एंड 15 को विस्तार से पढ सकते हो

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